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US Tariff hike 15%: भारत और वैश्विक व्यापार पर 2026 का प्रभाव

EDITED BY: Sanjeet

UPDATED: Monday, February 23, 2026

USA hike tariff 15%

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद सभी देशों पर 10% से बढ़ाकर 15% tariff लगा दिया है। यह बदलाव भारत-अमेरिका व्यापार समझौते को प्रभावित कर सकता है, खासकर निर्यातकों के लिए।

Tariff Hike का बैकग्राउंड

फरवरी 2026 में सुप्रीम कोर्ट ने ट्रंप के पुराने वैश्विक tariff को असंवैधानिक घोषित कर दिया। जवाब में व्हाइट हाउस ने 20 फरवरी को नया आदेश जारी किया, जिसमें सभी आयात पर अस्थायी 15% सरचार्ज लगाया गया। भारत पहले 25-50% tariff का सामना कर रहा था, जो अब MFN ड्यूटी के अतिरिक्त 15% हो गया।

यह कदम रूस से तेल खरीदारी और ब्रिक्स गतिविधियों पर दबाव बनाने के लिए है। कुल मिलाकर, भारत पर प्रभावी tariff 11-13% रहने का अनुमान है।​

भारत पर प्रभाव

भारत के 55% निर्यात (लगभग 87 अरब डॉलर) अब मानक MFN दरों पर लौट आएंगे, लेकिन स्टील, एल्यूमीनियम (50%) और ऑटो पार्ट्स (25%) पर सेक्शन 232 tariff बरकरार हैं। इलेक्ट्रॉनिक्स, फार्मा, पेट्रोलियम जैसे 40% उत्पाद छूट प्राप्त हैं।

सेक्टरप्रभाव
स्टील-एल्यूमीनियम50% tariff जारी, निर्यात घट सकता है ​
ऑटो पार्ट्सन्यूनतम असर, शेयर स्थिर ​
फार्मा-इलेक्ट्रॉनिक्सछूट बरकरार, कोई बदलाव नहीं
टेक्सटाइलसस्ता निर्यात संभव, लेकिन ट्रेड डील पर निर्भर ​

भारत-अमेरिका अंतरिम डील अप्रैल से लागू हो सकती है, जिसमें भारत को अमेरिकी सामान पर जीरो टैरिफ  की पेशकश है।​

वैश्विक व्यापार पर असर

यूरोपीय संघ और यूके ने चेतावनी दी है कि 15% टैरिफ  से ट्रेड डील खतरे में हैं। चीन पर अतिरिक्त फेंटेनिल tariff के साथ कुल बोझ बढ़ा। वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला बाधित हो सकती है, जिसमें 175 अरब डॉलर की रिफंड की संभावना है।

भारत को फायदा: निर्यात विविधीकरण तेज होगा, विदेशी मुद्रा भंडार मजबूत। आर्थिक सर्वे 2026 में कहा गया कि संरचनात्मक सुधार ट्रंप प्रभाव को कम करेंगे।​

भारतीय निर्यातकों के लिए सलाह

निर्यातक नए tariff कैलकुलेटर का उपयोग करें और SEZ छूट का लाभ लें। यूनियन बजट 2026 में श्रम-गहन सेक्टर्स के लिए ड्यूटी-फ्री आयात बढ़ाए गए। ट्रेड थिंकटैंक GTRI सलाह देता है कि डील की समीक्षा करें।

Frequently Asked Questions (FAQs):

प्रश्न 1: भारत पर 15% यूएस tariff का कितना असर पड़ेगा?

जवाब: कुल 11-13% प्रभावी दर, फार्मा और इलेक्ट्रॉनिक्स छूट प्राप्त।​

प्रश्न 2: क्या भारत-अमेरिका ट्रेड डील रद्द हो जाएगी?

जवाब: नहीं, अप्रैल 2026 से लागू होने की संभावना, लेकिन शर्तें बदल सकती हैं।​

प्रश्न 3: किन भारतीय उत्पाद सस्ते होंगे?

जवाब: टेक्सटाइल, स्टील (आंशिक), लेकिन रूस तेल पेनल्टी हटने से राहत।​

प्रश्न 4: वैश्विक अर्थव्यवस्था पर क्या प्रभाव?

जवाब: ट्रेड फॉग बढ़ेगा, यूरोप-चीन जवाबी कार्रवाई कर सकते हैं।

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IDFC First Bank धोखाधड़ी का पर्दाफाश: 590 करोड़ रुपये के चंडीगढ़ घोटाले का विस्तृत विवरण

EDITED BY: Sanjeet

UPDATED: Sunday, February 22, 2026

IDFC

IDFC फर्स्ट बैंक ने फरवरी 2026 में अपनी चंडीगढ़ शाखा में हुए 590 करोड़ रुपये के चौंकाने वाले धोखाधड़ी का खुलासा किया, जिसमें हरियाणा सरकार के खातों को निशाना बनाया गया था। इस घटना ने भारत में बैंक सुरक्षा और ग्राहक संरक्षण के बारे में गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

स्कैंडल टाइमलाइन

यह धोखाधड़ी 18 फरवरी, 2026 को सामने आई, जब हरियाणा सरकार के एक विभाग ने खातों में गड़बड़ी का पता चलने पर खाता बंद करने और धनराशि हस्तांतरण की मांग की। आंतरिक जांच में शाखा कर्मचारियों द्वारा अनधिकृत लेनदेन का खुलासा हुआ, जिसमें संभवतः बाहरी मिलीभगत शामिल थी और इससे कई सरकारी खातों पर असर पड़ा।

मुख्य विवरण और प्रभाव

इस घोटाले से चंडीगढ़ शाखा में हरियाणा सरकार के खाते प्रभावित हुए हैं, जिनमें कुल 590 करोड़ रुपये का मिलान लंबित है।

पहलूविवरण
मात्रा590 करोड़ रुपये
जगहचंडीगढ़ शाखा
प्रभावित खातेहरियाणा सरकार के विभाग
खोज18 फरवरी, 2026
स्थितिफोरेंसिक ऑडिट जारी है

बैंक की प्रतिक्रिया

IDFC फर्स्ट बैंक ने चार अधिकारियों को निलंबित कर दिया, पुलिस में शिकायत दर्ज कराई और बाहरी लेखा परीक्षकों को नियुक्त किया। अनुशासनात्मक और कानूनी कार्रवाई करने के लिए बोर्ड ने 20-21 फरवरी को बैठक की और अन्य बैंकों को वापस बुलाने के नोटिस जारी किए।

भारत में सबसे बड़ा बैंक घोटाला

भारत में अब तक दर्ज सबसे बड़ा बैंक घोटाला पंजाब नेशनल बैंक (पीएनबी) का है, जिसमें नीरव मोदी और मेहुल चोकसी ने 2011 से 2018 के बीच फर्जी वचनपत्रों के माध्यम से 14,000 करोड़ रुपये से अधिक की धोखाधड़ी की। IDFC के 590 करोड़ रुपये के घोटाले की तुलना में पीएनबी का घोटाला आकार में कहीं बड़ा है, जो व्यापार वित्त में व्याप्त खामियों को उजागर करता है।

IDFC बैंक के धोखाधड़ी के आंकड़े

IDFC फर्स्ट बैंक ने वित्त वर्ष 2025 में अपने सभी परिचालनों में कुल 1,241 करोड़ रुपये की धोखाधड़ी की सूचना दी, जिसमें चंडीगढ़ की घटना सबसे हालिया बड़ी घटना है। इससे पहले के मामलों में छोटे-मोटे यूपीआई और क्रेडिट कार्ड घोटाले शामिल हैं, लेकिन 2026 की 590 करोड़ रुपये की घटना आंतरिक संलिप्तता में तीव्र वृद्धि को दर्शाती है।

बैंकों को धोखाधड़ी के जोखिम से कौन बचाता है?

धोखाधड़ी की निगरानी के लिए गठित बैंक की विशेष समिति की प्राथमिक जिम्मेदारी होती है, जिसमें बोर्ड के सदस्य शामिल होते हैं जो धोखाधड़ी का पता लगाने और उसे कम करने की निगरानी करते हैं। आरबीआई ने आंतरिक लेखापरीक्षा टीमों, साइबर सुरक्षा इकाइयों और अनुपालन अधिकारियों के साथ-साथ सभी बैंकों के लिए इसे अनिवार्य किया है। आरबीआई और पुलिस जैसे बाहरी नियामक जांच का काम संभालते हैं, जबकि ग्राहकों को सतर्कता के लिए अलर्ट चालू रखना आवश्यक है।

क्या बैंक धोखाधड़ी से प्राप्त धन वापस करते हैं?

जी हां, आरबीआई के दिशानिर्देशों के तहत बैंक अक्सर धोखाधड़ी की रकम वापस कर देते हैं, बशर्ते इसकी सूचना 3 दिनों के भीतर दी जाए और दोषी की लापरवाही साबित न हो। IDFC फर्स्ट बैंक के चंडीगढ़ मामले में दावे की पुष्टि, बैंक पर अधिकार क्षेत्र और कानूनी वसूली का इंतजार है—पूरी रकम की वापसी ऑडिट के नतीजों और दोषियों की वसूली पर निर्भर करती है। अधिकृत लेन-देन पर शून्य-देयता नीति लागू होती है, लेकिन जटिल आंतरिक धोखाधड़ी के मामलों में देरी हो सकती है।

ग्राहक सुरक्षा युक्तियाँ

बैलेंस की जांच केवल शाखाओं के माध्यम से ही नहीं, बल्कि आधिकारिक ऐप्स के माध्यम से करें। रिफंड पाने के लिए रीयल-टाइम अलर्ट चालू करें और किसी भी गड़बड़ी की तुरंत रिपोर्ट करें। 590 करोड़ रुपये के इस घोटाले ने 2026 में बढ़ते बैंक धोखाधड़ी के मामलों के बीच स्वतंत्र निगरानी पर जोर दिया है।

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