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Mahindra XUV 700: जानिए क्या होगी नई कीमत जीएसटी में बदलाव के बाद

EDITED BY: Sanjeet

UPDATED: Friday, September 12, 2025

Mahindra XUV 700

जब से जीएसटी के डरो में बदलाव किए गए हैं तब से भारत में 2-व्हीलर और 4-व्हीलर की कीमतों में बदलाव आया है। ऐसी ही एक SUV है जो हाल फिल्हाल हर एक इंडियन की पसंदीदा एसयूवी में से एक है। Mahindra and Mahindra XUV 700 जो अगस्त, 2021 में लॉन्च हुई थी उसके अपने लुक और फीचर्स से लोगो का दिल जीत लिया। आइए जानते हैं कि जीएसटी में बदलाव के बाद इसकी कीमत में क्या बदलाव आया है।

GST में बदलाव होने के बाद क्या-क्या बदला है?

GST काउंसिल के 56वें ​​सबमिट में जो भी बदलाव किए गए हैं उनमें ये जिक्र था कि ऑटोमोबाइल्स पर कुल मिलाकर 48% टैक्स लगता है और उसको घाटा कर सिर्फ एक टैक्स लगेगा जो कि 40% होगा। वाहनों पर पहले 28% जीएसटी का साथ-साथ 20% तक का सेस लगाया जाता था, जिसका पूरा टैक्स 48% हो जाता था। अब नए बिल के साथ कोई भी गाड़ी जिसकी लंबाई 4 मीटर से जाती है और जिसकी इंजन क्षमता 1500 सीसी से जाती है उन पर सिर्फ 40% टैक्स लगाया जाएगा।

Mahindra XUV700 की नई रेंज: जाने कितनी सस्ती हुई गाड़िया

हालांकि, जीएसटी में जो भी बदलाव होंगे, वे 22 सितंबर, 2025 से लागू होंगे। लेकिन Mahindra ने अपने सभी ग्राहकों को यह लाभ 22 मार्च से पहले ही देने का फैसला किया है।

XUV 700 के जितने भी वेरिएंट हैं उन पर 88,900 रुपये से लेकर 1.43 लाख रुपये तक का डिस्काउंट है। जादा जानकारी के लिए सारे वेरिएंट की सूची और उनका नई कीमत की जानकारी नीचे दी गई तालिका में उपलब्ध है।

वेरिएंटपुरानी GST दरनई GST दरअनुमानित बचत
MX48%40%₹88,900
AX348%40%₹1,06,500
AX5 S48%40%₹1,10,200
AX548%40%₹1,18,300
AX748%40%₹1,31,900
AX7 L48%40%₹1,43,000

बदलाव के बाद Mahindra XUV 700 अब आम आदमी के लिए सस्ती और वैल्यू फॉर मनी कार बन चुकी है।

XUV 700 की कीमत में संशोधन होने के बाद आम आदमी पर इसका क्या फर्क पड़ेगा?

• ईएमआई कम: कार की कीमत कम होने पर लोन की राशि भी कम होगी और ब्याज भी कम होगा।

• ऑन-रोड कीमत कम: कार की कीमत कम होने से आरटीओ तक और बीमा प्रीमियम भी कम होगा, ये एक्स-शोरूम कीमत पर निर्भर करता है।

• बेहतर सिद्धांत विकल्प: अब यूजर के लिए अपने को अपग्रेड करना भी आसान हो जाएगा

Mahindra XUV700: क्यों है ये SUV खास?

XUV 700 अपने स्टाइल, फीचर्स और परफॉर्मेंस के लिए खास मानी जाती है। कुछ विशेषताएं हैं जो नीचे सूचीबद्ध हैं:

  • ADAS (Advanced Driver Assistance Systems)
  • Dual-zone climate control
  • Panoramic sunroof
  • Powerful petrol और diesel इंजन विकल्प
  • 5-star Global NCAP safety rating

इनके साथ-साथ इसकी इतनी सारी खुबिया इतने से दाम में मिलते हैं जिसके लिए ये हर किसी को पसंद है।

निष्कर्ष: यह XUV 700 लेने का सही समय क्या है?

बिल्कुल! अगर आप एक 7 सीटर SUV की शौकीन हैं जो दमदार भी और जिसकी किस्मत भी ज्यादा नहीं हो और जिसमें आप अपने शुद्ध परिवार के साथ कहीं घूमने जा सकें तो XUV 700 तक आपके लिए एक परफेक्ट एसयूवी हो सकती है। और हाल ही में जो इसकी कीमत संशोधित होने के बाद तो ये पूरी तरह से वैल्यू फॉर मनी कार बैन हो गई है।
 

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FY26 में बदला ऑटो ट्रेंड: सस्ती कारों से हटकर महंगी गाड़ियों की मांग

EDITED BY: Sanjeet

UPDATED: Monday, April 13, 2026

महंगी गाड़ियों

FY26 में ऑटो सेक्टर का मूड तेजी से बदल रहा है, और अब महंगी कारों की मांग बढ़ गई है। साफ तौर पर बाजार की नई कहानी बन गई है। जहां पहले कम कीमत वाली गाड़ियों की ओर रुख किया जाता था, वहीं अब फीचर-लोडेड, प्रीमियम और मॉडल्स की मांग ज्यादा दिख रही है।

यह बदलाव सिर्फ शोरूम तक सीमित नहीं है। ऑनलाइन सर्च, स्टार्टअप और शॉपिंग की बातचीत में भी अब किफायती कारें, फीचर से भरपूर कारें, FY26 का फर्क पहले से सबसे ज्यादा स्पष्ट दिख रहा है।

प्रीमियम सेगमेंट की तरफ झुकाव

2026 में लोगो का विज्ञापन करने का तरीका बदल गया है अब बड़ी बड़ी कार कंपनियों ने अपने प्रोडक्ट के कम दाम पर विज्ञापन नहीं दिखाया है, वो सब आज के दौर में लग्जरी फीचर जैसे बड़ी टच स्क्रीन, फीचर्स, ऑडियो क्वालिटी, ADAS, अलॉय व्हील्स और बहुत सारी आरामदायक चीजें दिखा कर करती है।

इसी वजह से मिड-रेंज और प्रीमियम कारों की तरफ झुकाव बढ़ा हुआ है। कई ग्राहक अब बेस के बजाय टॉप या मिड-टॉप के अलग-अलग विकल्प चुन रहे हैं, ताकि उन्हें अधिक मूल्य और लंबे समय तक बेहतर अनुभव मिल सके।

क्यों बढ़ रही है महंगी गाड़ियों की मांग

इस ट्रेंड के पीछे हैं कई वजहें। सबसे पहले, अनमोल अब कार को सिर्फ आवागमन के साधन की तरह नहीं देख रहे हैं, बल्कि एक लंबे समय की जीवनशैली संपत्ति की तरह देख रहे हैं। दूसरी ओर, ऑटो कंपनी ने भी फीचर से भरपूर कारों की रेंज इतनी मजबूत कर दी है कि एंट्री प्राइस से ग्राहक की तुलना में थोड़ा अधिक मूल्य मिल जाता है।

तीसरी वजह फाइनेंसिंग का आसान होना। ईएमआई विकल्प ने बड़ी गाड़ियों को पहले की तुलना में सबसे अधिक सुलभ बना दिया है। चौथा कारण यह है कि अंकित पुनर्विक्रय मूल्य, सुरक्षा रेटिंग और ईंधन-दक्षता के साथ-साथ प्रीमियम अनुभव भी देख रहे हैं।

सुविधा संपन्न कारों की जगह किफायती कारों ने ले ली है

किफायती कारों की मांग तो पूरी तरह खत्म नहीं हुई, लेकिन उसका स्वभाव बदल गया है। अब कई मॉडल सबसे सस्ती कार नहीं, बल्कि “कम बजट में सबसे खास” वाली कार चाहते हैं। यही कारण है कि सुविधा संपन्न कारों की बिक्री और खोज रुचि बढ़ती है।

यूजर्स भी इसी ट्रेंड को समझकर प्रोडक्ट्स को रीडिजाइन कर रहे हैं। कॉम्पैक्ट एसयूवी, स्ट्रॉन्ग-हाइब्रिड मॉडल, ईवी और मिड-साइज सेडान में ऐसे फीचर्स जोड़े जा रहे हैं जो पहले सिर्फ एसयूवी मॉडल में आते थे। यह मूल्य सीढ़ी थोड़ा ऊपर है, लेकिन कथित मूल्य भी लाभकारी है।

खरीदार अब क्या खोज रहे हैं

FY26 में खोज व्यवहार भी बदला गया है। लोग अब सिर्फ “बेस्ट बजट कार” नहीं, बल्कि “बेस्ट वैल्यू कार”, “सबसे सुरक्षित एसयूवी”, “लोडेड फीचर्स सेडान” और “प्रीमियम इलेक्ट्रिक कार” जैसे शब्द सबसे ज्यादा खोज रहे हैं।

इससे साफ है कि महंगी कारों की मांग में अस्थायी बढ़ोतरी नहीं है, बल्कि खरीदार की मानसिकता में गहरे बदलाव का संकेत है। खासकर शहरी बाजारों में खरीदार अब प्रौद्योगिकी, आराम और ब्रांड आकांक्षा को सबसे ज्यादा महत्व दे रहे हैं।

किन खंडों को सबसे अधिक लाभ होता है

सबसे अधिक लाभ उन खंडों को हो रहा है जो कीमत और प्रतिष्ठा के बीच संतुलन बनाए रखते हैं। इनमें कॉम्पैक्ट एसयूवी, प्रीमियम हैचबैक, मध्यम आकार की एसयूवी, इलेक्ट्रिक कारें और लक्जरी एंट्री-लेवल मॉडल शामिल हैं।

इन खंडों की प्रकृति यह है कि वे नमूनों को “अपग्रेडेड फील” देते हैं, लेकिन बहुत ऊपरी लक्जरी ब्रैकेट में नहीं जाते हैं। यही वजह है कि किफायती कारें, फीचर से भरपूर कारें, FY26 की चर्चा अब एक ही खरीदारी यात्रा में साथ चल रही है।

ऑटो कंपनियों की रणनीति भी बदली

कार उद्योग अब सिर्फ बेस प्राइस पर प्रतिस्पर्धा नहीं कर सकते। वे फीचर्स, सेफ्टी पैकेज, कनेक्टेड तकनीक, डिजाइन रिफ्रेश और लॉन्च टाइमिंग पर ज्यादा जोर दे रही हैं। कई ब्रांड के निचले वेरिएंट सीमित हैं, जिससे मिड और टॉप वेरिएंट की मांग बढ़ी है।

इसके साथ ही मूल्य निर्धारण अनुशासन भी दिख रहा है। सीधे तौर पर बहुत सारे प्लास्टिक और स्केचबुक की जगह ऐसे मॉडल ला रही हैं जिनमें मार्जिन भी अच्छा रहता है, ग्राहक को अपग्रेड का एहसास भी मिलता है। यही वजह है कि प्रीमियमाइजेशन अब ऑटो मार्केट का मुख्य विषय बन गया है।

बाजार पर इसका असर क्या होगा

यदि यह प्रवृत्ति इसी तरह जारी हो रही है, तो FY26 में औसत लेनदेन मूल्य और ऊपर जा सकता है। इसका मतलब यह है कि कारों की कुल बिक्री संख्या अभी भी स्थिर है, लेकिन राजस्व और प्रीमियम मिश्रण में बढ़ोतरी संभव है।

दूसरी तरफ, एंट्री-लेवल सेगमेंट पर दबाव बनाया जा सकता है। जिन इंवेस्टमेंट का बजट बहुत सीमित है, उनके लिए खरीदारी का निर्णय लेना कठिन हो सकता है। इसलिए भविष्य में कंपनी को सस्ती कारों और फीचर से भरपूर कारों के बीच सही संतुलन बनाना होगा।

आगे क्या देखने लायक है

आने वाले महीनों में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि यह क्या मांग है केवल लॉन्चिंग सीजन और नए फीचर की चर्चा सीमित है, या फिर यह FY26 की स्थायी खरीदारी की आदत बन गई है। ईवी अपनाने, सुरक्षा जागरूकता और प्रीमियम वित्तपोषण मिलकर इस प्रवृत्ति को और मजबूत कर सकते हैं।

भारतीय ऑटो बाजार अब मूल्य-संचालित से प्रीमियम-संचालित दिशा में बढ़ रहा है। इसी तरह के बदलावों से FY26 में महंगी कारों की मांग में बढ़ोतरी हुई है।

टेकअवे: FY26 में शामिल अब खास क्वालिटी वाली कार नहीं, बल्कि ज्यादा फीचर, बेहतर सुरक्षा और प्रीमियम एक्सपीरियंस वाली बाइक चुनी जा रही हैं, और आने वाले महीनों में यही बदलाव ऑटो मार्केट की दिशा तय कर सकते हैं।

यह भी पढ़ें: डिफेंडर ख़रीदारी है? लक्जरी एसयूवी कीमत, ईएमआई और किराया गाइड

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