अगर आप क्रिकेट प्रेमी हैं और क्रिकेट मैच के रोमांच और उत्साह के दीवाने हैं, तो यह खबर आपके लिए है। BCCI ने Women Cricketers की दैनिक फीस बढ़ाकर एक महत्वपूर्ण निर्णय लिया है। यह कदम न केवल समानता की भावना को बढ़ावा देगा, बल्कि महिला क्रिकेटरों का आत्मविश्वास भी बढ़ाएगा। हालांकि महिला क्रिकेट टीम पुरुष क्रिकेट टीम जितनी लोकप्रिय नहीं है, लेकिन वे अपने देश और टीम को जीत दिलाने के लिए उतना ही प्रयास करती हैं। तस्वीर में हरनाज़ कौर संधू चौके लगाती हुई और अपनी टीम के लिए खेलती हुई दिख रही हैं। अब उन्हें अपनी टीम के लिए किए गए प्रयासों का समान वेतन मिल रहा है। आइए इस निर्णय के बारे में विस्तार से जानते हैं।
हाल ही में, BCCI ने अपनी वार्षिक समीक्षा में यह पहल की है। उन्होंने भारतीय Women Cricketers की प्रति मैच फीस में 400% से 1000% तक की वृद्धि की है। पहले उन्हें प्रति मैच 1 लाख रुपये मिलते थे, अब उन्हें प्रति मैच 15 लाख रुपये मिलेंगे। एक दिवसीय मैचों के लिए उन्हें 5 से 12 लाख रुपये प्रति मैच और टी-20 अंतरराष्ट्रीय मैचों के लिए 3 से 10 लाख रुपये प्रति मैच मिलेंगे। इस बदलाव से उन्हें समानता का एहसास होगा और उनका आत्मविश्वास भी बढ़ेगा। BCCI सचिव देवजीत सैकिया ने कहा, “यह निर्णय महिलाओं का आत्मविश्वास बढ़ाने के लिए लिया गया है और हम चाहते हैं कि सभी भारतीय लड़कियां महिला क्रिकेट टीम का हिस्सा बनने का सपना देखें।”
यह कोई अचानक बदलाव नहीं है; महिला क्रिकेट टीम ने अपनी योग्यता साबित कर दी है। उन्होंने स्मृति मंदाना की कप्तानी में 2022 में एशिया कप जीता। 2023 में (महिला क्रिकेट लीग) WPL में उन्होंने एक नया रिकॉर्ड बनाया और पहले ही सीज़न में मुंबई इंडियंस विजेता बनी, फिर 2024 में आरसीबी ने जीत हासिल की। महिला क्रिकेट टीम की इन उपलब्धियों ने BCCI का ध्यान उनकी ओर आकर्षित किया और उन्हें पुरुष क्रिकेट टीम की तरह मानने पर मजबूर कर दिया।
महिला क्रिकेट में समानता का सफर: चुनौतियां और जीत
महिला क्रिकेट टीम का सफर आसान नहीं रहा, उन्होंने कई संघर्षों का सामना किया है। पहली भारतीय महिला क्रिकेट टीम का गठन 1976 में हुआ था, लेकिन शुरुआत में वे किसी का ध्यान आकर्षित नहीं कर पाईं। 41 साल बाद, 2017 में, मैथिली राज की कप्तानी में फाइनल में पहुंचकर उन्होंने सभी क्रिकेट प्रेमियों, विशेष रूप से बीबीसीसीआई का ध्यान अपनी ओर खींचा। ऐसा नहीं है कि उन्होंने समान वेतन के लिए आवाज नहीं उठाई, लेकिन उन्हें सफलता नहीं मिली। हरमीत कौर और जेमीमा हर रॉदग जैसी खिलाड़ियों ने पहले भी प्रयास किए थे। आखिरकार, इतने वर्षों का अनुभव और उनका संघर्ष रंग ला रहा है।
यह बदलाव न सिर्फ खिलाड़ियों को प्रोत्साहित करेगा, बल्कि ग्रामीण इलाकों से नई प्रतिभाओं को मैदान पर लाएगा। WPL ने पहले ही साबित कर दिया कि महिलाओं का क्रिकेट दर्शकों को खींच सकता है – पहले सीजन में 90 मिलियन से ज्यादा व्यूअर्स थे। अब फीस बढ़ने से और अधिक निवेश होगा, जिससे स्टेडियम भरे रहेंगे।
भविष्य की संभावनाएं: WPL और इंटरनेशनल क्रिकेट
बीसीसीआई के इस फैसले से मौजूदा खिलाड़ियों का आत्मविश्वास बढ़ेगा और नए खिलाड़ियों को भी प्रोत्साहन मिलेगा। इससे अगले सीज़न में महिला क्रिकेट टीम (डब्ल्यूपीएल) के खिलाड़ियों को एक और अवसर मिलेगा, उन्हें बड़े पैकेज मिलेंगे और वे डब्ल्यूपीएल में विदेशी खिलाड़ियों को आमंत्रित कर सकेंगे। BCCI का विज़न बिल्कुल स्पष्ट है, 2030 तक वे महिला क्रिकेट टीम को पुरुष क्रिकेट टीम के बराबर लाना चाहते हैं। बीसीसीआई महिला क्रिकेट टीम के साथ-साथ अपनी अंतरराष्ट्रीय रैंकिंग में भी सुधार करने जा रहा है।
प्रभाव और प्रतिक्रियाएं
खिलाड़ियों की खुशी का ठिकाना नहीं। स्मृति मंधाना ने ट्वीट किया, “यह सपनों को हकीकत में बदलने वाला कदम है!” फैंस सोशल मीडिया पर BCCI की तारीफ कर रहे हैं। #EqualPayForWomenCricket ट्रेंड कर रहा है। हालांकि, कुछ आलोचक कहते हैं कि अभी ग्रेड A+ कॉन्ट्रैक्ट्स में भी अंतर है, लेकिन BCCI ने वादा किया है कि अगले साल इसे ठीक करेंगे।
यह बदलाव भारतीय खेल संस्कृति को बदल देगा। क्रिकेट अब सिर्फ पुरुषों का खेल नहीं, बल्कि हर लिंग का उत्सव बनेगा।
Frequently Asked Questions:
1. BCCI ने महिला क्रिकेटरों की फीस कितनी बढ़ाई है?
टेस्ट के लिए 15 लाख, ODI के लिए 12 लाख, और T20I के लिए 10 लाख रुपये। यह पुरानी फीस से 400-1000% की बढ़ोतरी है।
2. यह बदलाव कब से लागू होगा?
2025 के आगामी सीरीज से, जिसमें इंग्लैंड और ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ मैच शामिल हैं।
3. पुरुष और महिला फीस में अभी अंतर क्यों है?
पुरुष टेस्ट फीस 45 लाख है, लेकिन BCCI धीरे-धीरे समानता ला रहा है। अगले साल पूर्ण समानता का लक्ष्य।
4. WPL पर इसका क्या असर पड़ेगा?
WPL में खिलाड़ी सैलरी बढ़ेगी, जिससे लीग और आकर्षक बनेगी और दर्शक संख्या बढ़ेगी।
5. अन्य देशों में ऐसी समानता कब आई?
ऑस्ट्रेलिया ने 2022 में पूर्ण समानता लागू की, जिसके बाद उनकी महिला टीम विश्व विजेता बनी।
Read More