दुनिया की सबसे शक्तिशाली सर्च इंजन वाली और सबसे बड़ी टेक कंपनियों में से एक, Google के लिए 4.75 अरब डॉलर में किसी ऊर्जा कंपनी को खरीदना कोई असामान्य बात नहीं है। Google की मूल कंपनी Alphabet ने जनवरी में स्वच्छ ऊर्जा उत्पादन करने वाली स्टार्टअप कंपनी “इंटरेस्ट पावर” का अधिग्रहण किया। स्वच्छ ऊर्जा के क्षेत्र में यह एक बड़ा सौदा है। लेकिन Google ने इस कंपनी को क्यों खरीदा? आइए इसके बारे में और गहराई से जानते हैं।
Google की AI और डेटा सेंटर की भूख बढ़ी बिजली की मांग
दुनिया के सबसे अधिक ऊर्जा खपत करने वाले उपकरणों में Google के एआई डेटा सेंटर शामिल हैं। चैटजीपीटी और जेमिनी मॉडल जैसे एआई उपकरणों के कारण 2025 तक बिजली की खपत पहले ही बढ़ चुकी है।
• डेटा सेंटरों के लिए बिजली की आवश्यकता: एक बड़े एआई डेटा सेंटर को उतनी ही बिजली की आवश्यकता होती है जितनी एक परमाणु ऊर्जा संयंत्र को।
• कार्बन-तटस्थता का लक्ष्य: हालांकि ग्रिड बिजली अपर्याप्त है, गूगल ने 2030 तक कार्बन-मुक्त बनने की प्रतिबद्धता जताई है।
• स्वच्छ ऊर्जा की कमी: सौर और पवन परियोजनाओं में देरी के कारण आपूर्ति श्रृंखला बाधित हो रही है। गूगल के सतत ऊर्जा प्रयासों से इस कमी को पूरा करने का इरादा है। गूगल के डेटा सेंटरों को इंटरसेक्ट पावर की 8 गीगावाट से अधिक की सौर और बैटरी भंडारण सुविधाओं से सीधे बिजली मिलेगी।
क्या यह सिर्फ बिजली का खेल है या बड़ा स्ट्रैटेजिक मूव?
इस अधिग्रहण से गूगल की ऊर्जा संबंधी रणनीति में एक नया आयाम जुड़ गया है।
गूगल पहले केवल अनुबंधों पर हस्ताक्षर करता था, लेकिन अब वह एक उत्पादक बन गया है।
लाभ
• लागत नियंत्रण: बिजली की कीमतों में वृद्धि को रोकना।
• नवाचार: ऊर्जा भंडारण को अनुकूलित करने के लिए कृत्रिम बुद्धिमत्ता का उपयोग करना।
• बाजार नेतृत्व: नवीकरणीय ऊर्जा की दिशा में माइक्रोसॉफ्ट और टेस्ला को पछाड़ना।
डेटा केंद्रों के बढ़ते विस्तार से भारत जैसे देशों में बिजली की समस्या और भी गंभीर हो रही है। गूगल के इस कदम के परिणामस्वरूप वैश्विक प्रौद्योगिकी क्षेत्र सतत ऊर्जा की ओर अग्रसर हो सकता है।




