हाल ही में 77वें गणतंत्र दिवस के अवसर पर यूरोपीय राष्ट्रपति उर्सुला वॉन डेर लेयेन ने भारत का दौरा किया। कई अन्य कारणों के साथ-साथ, एक कारण ऐसा भी था जिसने हमें सबसे अधिक उत्साहित किया, और वह था “Mother of All Deals”।
भारत-यूरोप व्यापार समझौते ने वैश्विक व्यापार में भारत को एक नया आयाम दिया है और इससे व्यापार को 140 अरब डॉलर तक बढ़ाने में भी मदद मिलेगी। आइए इस समझौते के बारे में विस्तार से जानें और इससे हमें क्या लाभ मिलेंगे।
India-Europe Trade Deal क्या है? पूरी जानकारी
भारत-यूरोप व्यापार समझौता कोई एक बार का काम नहीं था; हमारी भारतीय सरकार 2007 से यूरोप के साथ इस पर चर्चा कर रही थी और माना जा रहा था कि यह समझौता 2026 के अंत तक लागू हो जाएगा। अब यह समझौता दिल्ली में हस्ताक्षरित हो गया है और इसका जश्न मनाया जा रहा है।
इस व्यापार समझौते के कुछ प्रमुख बिंदु इस प्रकार हैं:
• बाज़ार पहुँच: इस व्यापार समझौते के अनुसार, यूरोप 99.5% आयातित वस्तुओं पर शुल्क हटा देगा। इसका अर्थ है कि भारतीय माल निर्यातकों के लिए यूरोप में अपने उत्पाद बेचना आसान हो जाएगा। इसके बदले में भारत अपने व्यापार मूल्य के 97.5% पर छूट देगा।
• वित्तीय विकास: इसके अनुसार, भारतीय कपड़ा, चमड़ा, रसायन, आभूषण और अन्य उद्योगों को बढ़ावा मिलेगा।
• छूट: इसके अनुसार, यूरोप लग्जरी कारों (बीएमडब्ल्यू और मर्सिडीज) और शराब पर निर्यात शुल्क कम करेगा।
• रणनीतिक साझेदारी: व्यापार समझौतों के अलावा, उन्होंने सुरक्षा और रक्षा साझेदारी जैसे अन्य समझौते भी किए हैं।
• प्रतिभाओं की आवाजाही: इससे उन सभी लोगों के लिए अवसरों के द्वार खुल गए हैं जो भारत से बाहर काम करने के इच्छुक हैं। इससे यूरोप में शिक्षा और काम के लिए जाना आसान हो जाएगा।
भारत को क्या फायदे? EU मार्केट कैसे खुलेगा?
मोदी का मदर ऑफ ऑल डील्स भारतीय निर्यातकों के लिए खुशहाली लाएगा। India-Europe Trade Deal से सालाना 100 अरब डॉलर का एक्स्ट्रा ट्रेड संभव:
| सेक्टर | अनुमानित बूस्ट (अरब $) | मुख्य फायदा |
| टेक्सटाइल्स | 30 | जीरो टैरिफ एंट्री |
| फार्मा | 25 | जेनेरिक मेडिसिन एक्सपोर्ट |
| ऑटो पार्ट्स | 20 | EU कार मार्केट एक्सेस |
| IT सर्विसेज | 35 | डेटा फ्लो नियम सरलीकरण |
भारतीय किसानों को डेयरी एक्सपोर्ट में राहत मिलेगी, जबकि EU को इंडियन IT और स्पाइसेस सस्ते मिलेंगे। India-EU trade agreement से SMEs को वैश्विक सप्लाई चेन में जगह मिलेगी।
चुनौतियां और जोखिम: क्या हैं कमियां?
इन सभी लाभों के अलावा, व्यापार समझौतों के साथ कुछ चुनौतियाँ और जोखिम भी जुड़े होते हैं:
- पर्यावरण और कार्बन विनियम: कार्बन बॉर्डर एडजस्टमेंट मैकेनिज्म (सीबीएएम) भारत के लिए एक बड़ा जोखिम बना हुआ है। जनवरी 2026 से शुरू होने वाला यूरोपीय संघ का कार्बन कर, इस्पात, सीमेंट और एल्युमीनियम जैसे कार्बन-गहन आयात पर लागू होगा, जिससे भारतीय निर्यात की प्रतिस्पर्धात्मकता में काफी कमी आ सकती है, जब तक कि विशिष्ट छूटों पर बातचीत न हो जाए।
- कड़े गैर-टैरिफ अवरोध: शून्य टैरिफ के बावजूद, भारतीय निर्यातकों – विशेष रूप से छोटे और मध्यम उद्यमों – को स्थिरता मानकों और तकनीकी विनियमों के कारण उच्च अनुपालन लागत का सामना करना पड़ता है।
- घरेलू उद्योग जोखिम: भारत-यूरोप व्यापार ने उच्च श्रेणी की घरेलू कारों पर शुल्क 110% से घटाकर 10% और शराब पर शुल्क 150% से घटाकर 20-30% कर दिया है। इससे भारतीय निर्माताओं के लिए कड़ी प्रतिस्पर्धा पैदा होगी।
- बौद्धिक संपदा एवं डेटा गोपनीयता
- जेनेरिक दवा: यूरोपीय संघ द्वारा बौद्धिक संपदा अधिकारों (आईपीआर), विशेष रूप से “डेटा विशिष्टता” की मांग, किफायती जेनेरिक दवाओं के उत्पादन में देरी करके भारत की “विश्व की फार्मेसी” के रूप में भूमिका को खतरे में डाल सकती है।
- डेटा स्थानीयकरण: डेटा गोपनीयता कानूनों और भारत के डेटा स्थानीयकरण नियमों पर लगातार मतभेद डिजिटल व्यापार और सेवाओं के लिए बाधाएं पैदा कर रहे हैं।
आगे का रोडमैप: व्यापार का भविष्य
India-Europe Trade Deal से 2030 तक द्विपक्षीय व्यापार 300 अरब डॉलर तक पहुंच सकता है। पीएम मोदी की विदेश नीति की जीत!



