जेरोम पॉवेल, जो वर्तमान में अमेरिकी Federal Reserve (Fed) के अध्यक्ष हैं, उनका कार्यकाल 2026 में समाप्त होने वाला है। इसी बीच डोनाल्ड ट्रम्प ने Kevin Warsh को अगले फेडरल अध्यक्ष के रूप में नामित किया है। ऐसी अफवाहें हैं कि ट्रम्प द्वारा उनके नाम को नामित करने के पीछे कुछ संभावित कारण हैं। आइए उन कारणों को विस्तार से जानते हैं:
Kevin Warsh की मजबूत पृष्ठभूमि
2006 से 2011 तक, Kevin Warsh फेडरल रिजर्व बोर्ड के गवर्नर रहे। वे सख्त मौद्रिक नीति के समर्थक हैं और वित्तीय संकट में उनकी महत्वपूर्ण भूमिका रही है। हार्वर्ड विश्वविद्यालय से स्नातक वॉर्श गोल्डमैन सैक्स में कार्यरत थे। मुद्रास्फीति नियंत्रण और ब्याज दरों में उनकी विशेषज्ञता ट्रंप की “अमेरिका फर्स्ट” नीति के अनुरूप है।
मुख्य कारण: ट्रंप का समर्थन
ट्रम्प ने 2017 में Kevin Warsh को चेयरमैन बनाने की इच्छा जताई थी। 2026 में ट्रम्प की वापसी के बाद, केविन वॉर्श को फेडरल रिजर्व का अगला चेयरमैन बनने की प्रबल संभावना है। वे कम ब्याज दरों और तीव्र आर्थिक विकास का समर्थन करते हैं, जो ट्रम्प की प्राथमिकताओं के अनुरूप हैं। हालिया रिपोर्टों से संकेत मिलता है कि सट्टेबाजी बाजार उन्हें 40% संभावना दे रहे हैं।
भारत और वैश्विक अर्थव्यवस्था पर असर
अगर केविन वॉर्श फेड चेयरमैन बनते हैं, तो डॉलर मजबूत होगा, जिससे भारत के निर्यात पर दबाव पड़ेगा। हालांकि, मुद्रास्फीति पर नियंत्रण से वैश्विक निवेश को बढ़ावा मिलेगा। रुपया 83-85 के बीच बना रह सकता है। संक्षेप में, वॉर्श का अनुभव, ट्रंप से संबंध और नीतिगत तालमेल उन्हें अगला फेडरल रिजर्व चेयरमैन बनने का प्रबल दावेदार बनाते हैं।





