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Ashok Buildcon Q3 Result 2025: रेवेन्यू रॉकेट, शेयर प्राइस कहाँ जाएगा?

EDITED BY: Sanjeet

UPDATED: Monday, February 2, 2026

Ashok Buildcon

Ashok Buildcon, जिसका मुख्य व्यवसाय क्षेत्र अवसंरचना विकास, ईपीसी (इंजीनियरिंग, प्रोक्योरमेंट और कंस्ट्रक्शन), बीओटी (बिल्ड-ऑपरेट-ट्रांसफर) और एचएएम (हाइब्रिड एन्युटी मॉडल) जैसे अन्य क्षेत्रों में फैला हुआ है, ने हाल ही में अपने तीसरी तिमाही के नतीजे जारी किए हैं, जिनमें राजस्व में अभूतपूर्व वृद्धि दर्ज की गई है। यह निवेशकों के लिए सबसे अच्छा विकल्प बनता जा रहा है। आइए आंकड़ों के बारे में विस्तार से जानते हैं:

Ashok Buildcon Q3 रिजल्ट के मुख्य हाइलाइट्स

यहां उस कंपनी के कुछ आंकड़े दिए गए हैं जिसने अपने प्रदर्शन से बाजार को चौंका दिया है। ये आंकड़े इस प्रकार हैं:

  • रेवेन्यू: ₹1,450 करोड़ (पिछले साल से 28% बढ़ोतरी) – रॉकेट स्पीड!
  • नेट प्रॉफिट: ₹85 करोड़, जो Q2 से 15% ऊपर।
  • EBITDA मार्जिन: 14.5%, कॉस्ट कंट्रोल की वजह से मजबूत।
  • ऑर्डर बुक: ₹12,000 करोड़ से ज्यादा, नए प्रोजेक्ट्स से बूस्ट।
  • डेट रिडक्शन: ₹500 करोड़ का कर्ज कम, बैलेंस शीट हेल्दी।

शेयर प्राइस का क्या होगा? एक्सपर्ट व्यू

कंपनी द्वारा अपने तीसरी तिमाही के नतीजे प्रकाशित करते ही, कंपनी के शेयर की कीमत में लगभग 8% की तेजी देखी गई है। यह कंपनी के लिए सकारात्मक संकेत है। आंकड़े इस प्रकार हैं:

  • टारगेट प्राइस: ₹220-250 (मोटिलाल ओसवाल रिपोर्ट)।
  • बुलिश फैक्टर्स: सरकारी हाईवे प्रोजेक्ट्स, HAM मॉडल में एक्सपर्टाइज।
  • रिस्क्स: रॉ मटेरियल कॉस्ट बढ़ना, चुनावी अनिश्चितता।
पैरामीटरQ3 FY25Q3 FY24ग्रोथ %
रेवेन्यू₹1,450 Cr₹1,130 Cr28%
प्रॉफिट₹85 Cr₹72 Cr18%

निष्कर्ष:

यदि आप शेयर में निवेश करना चाहते हैं और लंबे समय तक उसे अपने पास रखना चाहते हैं, तो Ashok Buildcon आपको इसके शेयर में निवेश करने का सुनहरा अवसर दे रहा है।

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सोना-चांदी में रिकॉर्ड उछाल: आज के ताज़ा रेट और बढ़त की बड़ी वजह

EDITED BY: Sanjeet

UPDATED: Saturday, April 25, 2026

सोना

सोने का भाव, सोने की कीमत में आज फिर तेजी से देखने को मिली है, और चांदी का भाव भी मौलिक कलाकार पर बन गया है। विश्वव्यापी, सुरक्षित निवेश की मांग और सराफा बाजार में दबाव ने मूल्य वृद्धि को और हवा दी है।

रिकॉर्ड तेजी क्यों दिख रही है?

सोना और चांदी दोनों की नीलामी में उछाल की सबसे बड़ी खरीदारी “सेफ-हेवन” है। जब भी दुनिया के शेयर बाजार में विपक्ष का रुख होता है, तो केंद्रीय उद्यमियों की भागीदारी को लेकर प्रतिष्ठा बढ़ती है या भू-राजनीतिक तनाव तेजी से होता है। यही कारण है कि आज सोने की कीमत को लेकर बाजार में लगातार चर्चा बनी हुई है।

इसके साथ ही डॉलर शेयरधारक, अमेरिकी बॉन्ड यील्ड और रुचि की उम्मीदों का भी सीधा असर सोना के भाव पर पड़ता है। जब डॉलर में गिरावट होती है या फिर शेयरों में कटौती की संभावना बनती है, तो सोना और चांदी की बातें और आकर्षण हो जाते हैं।

आज के ताज़ा रेट का रुझान

मार्केट ट्रेंड्स के मुताबिक, सोने एक बार फिर से मजबूत हुआ है और चांदी का भाव भी मजबूत हुआ है। घरेलू बाजार में ग्लोबल इंटरनेशनल सराफा दुकानों के साथ चल रहे हैं, जबकि लागत लागत और प्रीमियम भी प्रभावित हो रहे हैं।

निवेशकों के अनुसार, स्थिर तेजी सिर्फ एक-दो दिन की चाल नहीं है, बल्कि यह उस व्यापक बाजार का हिस्सा है जिसमें निवेशक से बचकर सुरक्षित विकल्प चुने जा रहे हैं। इसी वजह से कीमत में उछाल कई अलग-अलग चीजें दिख रही हैं।

सोने का प्रीमियम क्यों बढ़ रहा है?

सराफा बाजार में प्रीमियम की शर्त यह संकेत देती है कि भौतिक सोने की मांग अच्छी है, लेकिन आपूर्ति इतनी तेज नहीं है। भारत जैसे बड़े उपभोक्ता बाजार में त्योहारों, शादी-विवाह की खरीद और निवेश की मांग का सीधा असर प्रीमियम पर है।

जब आयात लागत प्रबल होती है, आपूर्ति तंग होती है, या बाजार में खरीदारी तेजी से होती है, तब सोने का प्रीमियम ऊपर चला जाता है। यही कारण है कि सोना का भाव सिर्फ वैश्विक भंडार से नहीं, बल्कि स्थानीय मांग और संस्कृत से भी होता है।

चांदी का भाव भी क्यों मजबूत है?

चांदी अब सिर्फ आभूषण या निवेश की धातु नहीं रह गई है। इसका इस्तेमाल सोलर पैनल, इलेक्ट्रॉनिक्स और औद्योगिक उत्पादन में भी बड़े पैमाने पर होता है। इसलिए चांदी का भाव दोहरी मांग से प्रभावित होता है — निवेश और उद्योग, दोनों से।

अगर वैश्विक इंडस्ट्रियल गतिविधि तेज़ होती है, तो चांदी की कीमतों को सपोर्ट मिलता है। और जब निवेशक इसे सस्ते विकल्प के रूप में देखते हैं, तब भी इसकी मांग बढ़ती है। इस समय दोनों वजहें साथ काम कर रही हैं, इसलिए चांदी का भाव भी तेजी दिखा रहा है।

निवेशकों के लिए इसका क्या मतलब है?

विश्लेषकों का कहना है कि सोने और चांदी की यह तेजी हमेशा एक ही दिशा में नहीं रहेगी। कभी-कभी तेज कीमत में उछाल के बाद दावावसूली भी आती है। इसलिए खरीदारी का निर्णय सिर्फ हेडलाइन देखकर नहीं, बल्कि अपने निवेश लक्ष्य से लेना चाहिए।

लंबी अवधि के निवेशकों के लिए सोना अब भी पोर्टफोलियो डाइवर्सिफिकेशन का महत्वपूर्ण हिस्सा माना जाता है। वहीं चांदी का भाव अधिक वोलैटाइल होता है, इसलिए इसमें जोखिम भी ज्यादा और रिटर्न की संभावनाएं भी तेज़ रहती हैं।

क्या अभी खरीदना सही रहेगा?

यह सवाल हर निवेशक के मन में होता है, लेकिन इसका जवाब समय, उद्देश्य और जोखिम क्षमता पर निर्भर करता है। अगर लक्ष्य बचत को महंगाई से बचाना है, तो सोना का भाव ट्रैक करना जरूरी है। अगर लक्ष्य तेज़ रिटर्न की उम्मीद है, तो चांदी में उतार-चढ़ाव को ध्यान से समझना होगा।

फिफ्टी शॉपिंग, गोल्ड ईटीएफ, सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड या सिल्वर ईटीएफ जैसे विकल्प अलग-अलग प्रोफाइल के लिए बेहतर हो सकते हैं। लेकिन किसी भी विकल्प में प्रवेश से पहले दर की प्रवृत्ति, प्रीमियम और समग्र बाजार पर नजर रखना जरूरी है।

आगे क्या रुख रह सकता है?

निकट भविष्य में सोने और चांदी की दिशा काफी हद तक वैश्विक आर्थिक स्तर पर तय की गई है। अगर होटल में अवशेष बना रहता है, तो सोने की कीमत और मजबूत रह सकती है। दूसरी ओर, अगर डॉलर मजबूत होता है या बॉन्ड यील्ड ऊपर होता है, तो दबाव तेजी से बढ़ता है।

सूची चित्र यही है कि सुरक्षित निवेश की मांग, सराफा बाजार की तंगी और मूल्य वृद्धि की भावना मिलकर सोने-रेवेरिया को एनालिस्ट में रख रही है। इसलिए आने वाले दिनों में सोने का भाव और चांदी का भाव दोनों पर नवजात की पानी नजर बनी रहेगी।

निष्कर्ष

सोने का भाव, सोने की कीमत का स्थान अस्थिर नहीं है। इसके पीछे वैश्विक साम्राज्य, निवेशकों की सुरक्षा-प्रवृत्ति, सराफा बाजार के प्रीमियम और थोक खरीदारी का संयुक्त प्रभाव है। चाँदी का भाव भी इसी तरह के राक्षस में ऊपर बना हुआ है, जिससे समय यह बाजार पर नजर रखने वाले और विसर्जन – दोनों के लिए बेहद अहम बन गया है।

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