IDFC फर्स्ट बैंक ने फरवरी 2026 में अपनी चंडीगढ़ शाखा में हुए 590 करोड़ रुपये के चौंकाने वाले धोखाधड़ी का खुलासा किया, जिसमें हरियाणा सरकार के खातों को निशाना बनाया गया था। इस घटना ने भारत में बैंक सुरक्षा और ग्राहक संरक्षण के बारे में गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
स्कैंडल टाइमलाइन
यह धोखाधड़ी 18 फरवरी, 2026 को सामने आई, जब हरियाणा सरकार के एक विभाग ने खातों में गड़बड़ी का पता चलने पर खाता बंद करने और धनराशि हस्तांतरण की मांग की। आंतरिक जांच में शाखा कर्मचारियों द्वारा अनधिकृत लेनदेन का खुलासा हुआ, जिसमें संभवतः बाहरी मिलीभगत शामिल थी और इससे कई सरकारी खातों पर असर पड़ा।
मुख्य विवरण और प्रभाव
इस घोटाले से चंडीगढ़ शाखा में हरियाणा सरकार के खाते प्रभावित हुए हैं, जिनमें कुल 590 करोड़ रुपये का मिलान लंबित है।
| पहलू | विवरण |
| मात्रा | 590 करोड़ रुपये |
| जगह | चंडीगढ़ शाखा |
| प्रभावित खाते | हरियाणा सरकार के विभाग |
| खोज | 18 फरवरी, 2026 |
| स्थिति | फोरेंसिक ऑडिट जारी है |
बैंक की प्रतिक्रिया
IDFC फर्स्ट बैंक ने चार अधिकारियों को निलंबित कर दिया, पुलिस में शिकायत दर्ज कराई और बाहरी लेखा परीक्षकों को नियुक्त किया। अनुशासनात्मक और कानूनी कार्रवाई करने के लिए बोर्ड ने 20-21 फरवरी को बैठक की और अन्य बैंकों को वापस बुलाने के नोटिस जारी किए।
भारत में सबसे बड़ा बैंक घोटाला
भारत में अब तक दर्ज सबसे बड़ा बैंक घोटाला पंजाब नेशनल बैंक (पीएनबी) का है, जिसमें नीरव मोदी और मेहुल चोकसी ने 2011 से 2018 के बीच फर्जी वचनपत्रों के माध्यम से 14,000 करोड़ रुपये से अधिक की धोखाधड़ी की। IDFC के 590 करोड़ रुपये के घोटाले की तुलना में पीएनबी का घोटाला आकार में कहीं बड़ा है, जो व्यापार वित्त में व्याप्त खामियों को उजागर करता है।
IDFC बैंक के धोखाधड़ी के आंकड़े
IDFC फर्स्ट बैंक ने वित्त वर्ष 2025 में अपने सभी परिचालनों में कुल 1,241 करोड़ रुपये की धोखाधड़ी की सूचना दी, जिसमें चंडीगढ़ की घटना सबसे हालिया बड़ी घटना है। इससे पहले के मामलों में छोटे-मोटे यूपीआई और क्रेडिट कार्ड घोटाले शामिल हैं, लेकिन 2026 की 590 करोड़ रुपये की घटना आंतरिक संलिप्तता में तीव्र वृद्धि को दर्शाती है।
बैंकों को धोखाधड़ी के जोखिम से कौन बचाता है?
धोखाधड़ी की निगरानी के लिए गठित बैंक की विशेष समिति की प्राथमिक जिम्मेदारी होती है, जिसमें बोर्ड के सदस्य शामिल होते हैं जो धोखाधड़ी का पता लगाने और उसे कम करने की निगरानी करते हैं। आरबीआई ने आंतरिक लेखापरीक्षा टीमों, साइबर सुरक्षा इकाइयों और अनुपालन अधिकारियों के साथ-साथ सभी बैंकों के लिए इसे अनिवार्य किया है। आरबीआई और पुलिस जैसे बाहरी नियामक जांच का काम संभालते हैं, जबकि ग्राहकों को सतर्कता के लिए अलर्ट चालू रखना आवश्यक है।
क्या बैंक धोखाधड़ी से प्राप्त धन वापस करते हैं?
जी हां, आरबीआई के दिशानिर्देशों के तहत बैंक अक्सर धोखाधड़ी की रकम वापस कर देते हैं, बशर्ते इसकी सूचना 3 दिनों के भीतर दी जाए और दोषी की लापरवाही साबित न हो। IDFC फर्स्ट बैंक के चंडीगढ़ मामले में दावे की पुष्टि, बैंक पर अधिकार क्षेत्र और कानूनी वसूली का इंतजार है—पूरी रकम की वापसी ऑडिट के नतीजों और दोषियों की वसूली पर निर्भर करती है। अधिकृत लेन-देन पर शून्य-देयता नीति लागू होती है, लेकिन जटिल आंतरिक धोखाधड़ी के मामलों में देरी हो सकती है।
ग्राहक सुरक्षा युक्तियाँ
बैलेंस की जांच केवल शाखाओं के माध्यम से ही नहीं, बल्कि आधिकारिक ऐप्स के माध्यम से करें। रिफंड पाने के लिए रीयल-टाइम अलर्ट चालू करें और किसी भी गड़बड़ी की तुरंत रिपोर्ट करें। 590 करोड़ रुपये के इस घोटाले ने 2026 में बढ़ते बैंक धोखाधड़ी के मामलों के बीच स्वतंत्र निगरानी पर जोर दिया है।




