भारत का अग्रणी मूल्य-आधारित ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म Meesho, जो लाखों खरीदारों को छोटे और मध्यम विक्रेताओं से जोड़ने के लिए जाना जाता है, ने हाल ही में वित्त वर्ष 2026 की तीसरी तिमाही के नतीजे जारी किए हैं, जिसमें कंपनी का शुद्ध घाटा 12 गुना बढ़कर 491 करोड़ रुपये हो गया है। राजस्व में वृद्धि के बावजूद, खर्चों में 44% की बढ़ोतरी हुई है, जिससे लाभप्रदता की संभावना कम ही रह गई है।
Meesho Q3 के वित्तीय मुख्य बिंदु
Meesho का समेकित घाटा पिछले वर्ष की तुलना में 13 गुना बढ़कर 491 करोड़ रुपये हो गया है, जबकि राजस्व में 32% की वृद्धि दर्ज की गई है और यह 3,516 करोड़ रुपये तक पहुंच गया है। कंपनी का शुद्ध व्यापारिक मूल्य (NMV) 26% बढ़कर 10,995 करोड़ रुपये हो गया है। व्यय में मुख्य रूप से विपणन और परिचालन लागतों में 44% की वृद्धि हुई है।
यह प्रमुख मापदंड है:
| Metric | Q3 FY26 | YoY Change |
| Revenue | ₹3,518 Cr | +32% |
| Net Loss | ₹491 Cr | +12x |
| Expenses | N/A | +44% |
| NMV | ₹10,995 Cr | +26% |
Loss के पीछे मुख्य Reasons
Meesho के घाटे के कई संभावित कारण हैं। इनमें परिचालन व्यय, विपणन व्यय और कर्मचारी लागत प्रमुख हैं। आंकड़ों की बात करें तो, उनके विपणन व्यय में 50% और कर्मचारी लागत में 30% की वृद्धि हुई है। आईपीओ के बाद की विस्तार रणनीति ने नकदी की खपत बढ़ा दी, जबकि उपयोगकर्ताओं की संख्या 251 मिलियन तक पहुंच गई थी। अलग-अलग आधार पर घाटा कम था, लेकिन समेकित आंकड़े चिंताजनक हैं।
राजस्व वृद्धि चालक
राजस्व में यह उछाल ऑर्डरों में 25% की वृद्धि (690 मिलियन) और औसत ऑर्डर मूल्य में सुधार के कारण हुआ है। ग्रामीण विक्रेता नेटवर्क का योगदान बढ़ा है, लेकिन प्रतिस्पर्धा के कारण मार्जिन पर दबाव बना हुआ है। प्रबंधन का कहना है कि 2026 में लाभप्रदता पर विशेष ध्यान दिया जाएगा।
Future Outlook और निवेशकों के लिए Tips
कंपनी ने अपने चौथी तिमाही के नतीजों में घाटे को नियंत्रित करने के मजबूत संकेत दिखाए हैं। अगर आप मीशो में निवेश करना चाहते हैं, तो इसे केवल दीर्घकालिक निवेश के लिए ही करें। अल्पकालिक निवेश में आपको कोई लाभ मिलने की संभावना नहीं है।




