Reliance Industries Limited (RIL) ने वित्त वर्ष 2026 की तीसरी तिमाही की रिपोर्ट में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि का खुलासा किया है: रिलायंस जियो के अब 250 मिलियन से अधिक 5जी ग्राहक हो गए हैं! जियो के 5जी नेटवर्क की बढ़ती ताकत को प्रदर्शित करने के साथ-साथ, यह उपलब्धि भारत के डिजिटल परिवर्तन को नई गति प्रदान करती है।
RIL के तीसरी तिमाही के आंकड़ों के अनुसार, Jio के 5 करोड़ वायरलेस ग्राहकों में से आधे से अधिक वास्तव में 5G उपयोगकर्ता हैं। कंपनी के प्रयासों के फलस्वरूप, भारत के 7,500 से अधिक शहरों में अब 5G कवरेज उपलब्ध है। परिणामस्वरूप, हाई-स्पीड 5G डेटा प्लान के कारण प्रति उपयोगकर्ता औसत राजस्व (ARPU) में 12% की वृद्धि हुई है। Jio की किफायती 5G प्रीपेड सेवाओं के कारण ग्रामीण क्षेत्रों में भी अब हाई-स्पीड इंटरनेट की सुविधा उपलब्ध है।
RIL के अन्य सेगमेंट्स में मजबूती
वैश्विक चुनौतियों के बावजूद, तेल से रसायन (O2C) क्षेत्र ने मजबूती का प्रदर्शन किया, वहीं रिलायंस रिटेल ने तीसरी तिमाही में राजस्व में 18% की वृद्धि दर्ज की। EBITDA में 8% की वृद्धि के साथ, RIL का कुल राजस्व ₹2.50 लाख करोड़ से अधिक हो गया। रिलायंस ने आधिकारिक तौर पर 5G सेवाओं के माध्यम से राजस्व जुटाना शुरू कर दिया है।
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद सभी देशों पर 10% से बढ़ाकर 15% tariff लगा दिया है। यह बदलाव भारत-अमेरिका व्यापार समझौते को प्रभावित कर सकता है, खासकर निर्यातकों के लिए।
फरवरी 2026 में सुप्रीम कोर्ट ने ट्रंप के पुराने वैश्विक tariff को असंवैधानिक घोषित कर दिया। जवाब में व्हाइट हाउस ने 20 फरवरी को नया आदेश जारी किया, जिसमें सभी आयात पर अस्थायी 15% सरचार्ज लगाया गया। भारत पहले 25-50% tariff का सामना कर रहा था, जो अब MFN ड्यूटी के अतिरिक्त 15% हो गया।
यह कदम रूस से तेल खरीदारी और ब्रिक्स गतिविधियों पर दबाव बनाने के लिए है। कुल मिलाकर, भारत पर प्रभावी tariff 11-13% रहने का अनुमान है।
भारत पर प्रभाव
भारत के 55% निर्यात (लगभग 87 अरब डॉलर) अब मानक MFN दरों पर लौट आएंगे, लेकिन स्टील, एल्यूमीनियम (50%) और ऑटो पार्ट्स (25%) पर सेक्शन 232 tariff बरकरार हैं। इलेक्ट्रॉनिक्स, फार्मा, पेट्रोलियम जैसे 40% उत्पाद छूट प्राप्त हैं।
सेक्टर
प्रभाव
स्टील-एल्यूमीनियम
50% tariff जारी, निर्यात घट सकता है
ऑटो पार्ट्स
न्यूनतम असर, शेयर स्थिर
फार्मा-इलेक्ट्रॉनिक्स
छूट बरकरार, कोई बदलाव नहीं
टेक्सटाइल
सस्ता निर्यात संभव, लेकिन ट्रेड डील पर निर्भर
भारत-अमेरिका अंतरिम डील अप्रैल से लागू हो सकती है, जिसमें भारत को अमेरिकी सामान पर जीरो टैरिफ की पेशकश है।
यूरोपीय संघ और यूके ने चेतावनी दी है कि 15% टैरिफ से ट्रेड डील खतरे में हैं। चीन पर अतिरिक्त फेंटेनिल tariff के साथ कुल बोझ बढ़ा। वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला बाधित हो सकती है, जिसमें 175 अरब डॉलर की रिफंड की संभावना है।
भारत को फायदा: निर्यात विविधीकरण तेज होगा, विदेशी मुद्रा भंडार मजबूत। आर्थिक सर्वे 2026 में कहा गया कि संरचनात्मक सुधार ट्रंप प्रभाव को कम करेंगे।
भारतीय निर्यातकों के लिए सलाह
निर्यातक नए tariff कैलकुलेटर का उपयोग करें और SEZ छूट का लाभ लें। यूनियन बजट 2026 में श्रम-गहन सेक्टर्स के लिए ड्यूटी-फ्री आयात बढ़ाए गए। ट्रेड थिंकटैंक GTRI सलाह देता है कि डील की समीक्षा करें।