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Amitabh Bachchan – एक जीवन, काई किस्से: द लाइफ बिहाइंड द लेजेंड

EDITED BY: Sanjeet

UPDATED: Tuesday, October 14, 2025

Amitabh Bachchan

जब भी कोई भारतीय सिनेमा का नाम लेगा तो उसके जहां में Amitabh Bachchan का नाम खुद पर खुद आना सामान्य है। उनके चाहने वालों ने उन्हें प्यार की इल्वा कुछ नाम भी दिया है जैसे सहांशा, एंग्री यंग मैन, बिग बी। लेकिन क्या कोई जनता है कि टाइटल के पीछे उनका क्या स्ट्रगल छिपा हुआ है, अपने जीवन में बहुत सारे उतार-चढ़ाव देखे हैं। आइये जानते हैं उनके जीवन के बारे में कुछ और बातें।

प्रारंभिक जीवन और परिवार

Amitabh Bachchan मूल रूप से इलाहबाद (प्रयागराज) के निवासी हैं। जिनका जन्म 11 अक्टूबर, 1942 को हुआ था। उनके पिता हरिवंश राय बच्चन एक लोकप्रिय हिंदी कवि थे और माता तेजी राय बच्चन एक समाज सेविका थीं। इनका सुरुआती सरनेम श्रीवास्तव हुआ करता था पर हरिवशराय बच्चन ने इसे बदल कर बच्चन रख लिया था।

Amitabh Bachchan को बचपन से ही साहित्य और कला का माहोल मिला जिस ने उनके अंदर एक गहरी छाप छोरी है।

संघर्ष के दौरान:

Amitabh Bachchan के लिए सिनेमा जगत में घुसना इतना आसान भी नहीं था। उनकी एक अलग पर्सनैलिटी थी जिसमें लंबी ऊंचाई, गहरी और बोल्ड आवाज थी और इसी वजह से उन्हें बहुत सारा ऑडिशन से रिजेक्शन का सामना करना पड़ा था, यहां तक ​​कि ऑल इंडिया रेडियो (AIR) ने भी उनकी आवाज के कारण से उन्हें रिजेक्ट कर दिया था।

वर्ष 1969 में उनको पहली बार अपनी प्रतिभा दिखाने का मौका “सात हिंदुस्तानी” से मिला पर सुरुआती किस्मत अच्छी नहीं रही और उनकी ये फिल्म असफल रही। आने वाले कुछ साल भी कुछ ठीक नहीं रहे और उनकी सारी फिल्मों को नाकामी का सामना करना पड़ेगा।

एंग्री यंग मैन का उदय:

सालो की नाकामी के बाद साल 1973 में Amitabh Bachchan की एक और फिल्म आई जिसका नाम “जंजीर” था, और इस फिल्म ने सब कुछ बदल कर रख दिया। Amitabh Bachchan की ये फिल्म सुपरहिट हुई। इशी फिल्म ने इन्हें “एंग्री यंग मैन” का टाइटल दिया। जिस समय भारतीय युवाओं में भ्रष्टाचार और अन्याय से जूझ रहा था उसी समय युवाओं की आवाज में Amitabh Bachchan की फिल्म बन गई।

इस सिनेमा के बाद जैसे Amitabh Bachchan के दिन ही बदल गए। उन्हें एक से बढ़कर एक हिट फिल्में दी। इनमें से कुछ फिल्में ऐसी हैं जिनके कुछ डायलॉग्स आज भी लोगो के दिलों में बसे हुए हैं।

  • दीवार (1975) – “आज मेरे पास गाड़ी है, बंगला है, दौलत है…”
  • शोले (1975) – जय का शांत लेकिन गहरा किरदार।
  • अमर अकबर एंथनी (1977) – कॉमिक टाइमिंग का शानदार उदाहरण।
  • डॉन (1978) – “डॉन को पकड़ना मुश्किल ही नहीं, नामुमकिन है।”

मौत से जंग – कूली हादसा

1982 में रिलीज हुई “कुली” फिल्म को सब ने बहुत प्यार दिया था। इसी फिल्म की शूटिंग के दौरान Amitabh Bachchan के साथ एक गंभीर दुर्घटना हुई थी, जिस में उन्हें बहुत चोट आई थी और उनकी हालत बहुत खराब हो गई थी। मंदिर, मस्जिद हर क्षेत्र के लोग अपना धर्म भूल कर उनकी सलामती की खातिर ऊपर वाले से दुआ मांग रहे थे। कुछ दिनों के चले इलाज के बाद जब वो स्वस्थ हो कर आए तो उनके प्रशंसकों में खुशी के लहर दौर परी, क्योंकि ये सिर्फ उनकी नहीं बल्कि पूरे देश की जीत थी।

असफलता और पुनर्जन्म

पर वो कहा जाता है ना कि कुछ भी हमेशा के लिए नहीं होता है। 1973 – 1978 तक एक के बाद एक सुपरहिट देने के बाद कुछ दिन इनके जीवन में ऐसे भी आये जब इन्हें पतन का भी सामना करना पड़ा। एक के बाद एक उनकी फिल्में फ्लॉप हो रही थीं, यहां तक ​​कि उनकी कंपनी। ABCL (Amitabh Bachchan कॉर्पोरेशन लिमिटेड) भी डूब गई और वह वित्तीय संकट में आ गई। हेटर्स ने कहा कि अब उनका दौर ख़तम हो गया है।

लेकिन साल 2000 में Amitabh Bachchan ने एक और शो शुरू किया जिसका नाम रखा “कौन बनेगा करोड़पति (KBC)”। उनकी एकजुटता, सादगी और ज्ञान ने उन्हें हर घर का सदस्य बनाया और उन्हें एक नई पहचान दी।

उम्र को मात देने वाला कलाकार

60, 70 और अब 80 की उम्र में भी वे लगातार शानदार भूमिकाएं निभा रहे हैं:

  • मोहब्बतें (2000) – सख्त लेकिन भावुक नारायण शंकर।
  • ब्लैक (2005) – एक शिक्षक की अविस्मरणीय भूमिका।
  • पा (2009) – प्रोजेरिया से पीड़ित बच्चे का किरदार।
  • पिंक (2016) – “नो मीन्स नो” संवाद ने समाज को झकझोरा।

गुलाबो सिताबो (2020) – प्रयोगधर्मी और अनोखा अभिनय।

पर्दे के पीछे का इंसान

Amitabh Bachchan सिर्फ़ अभिनेता ही नहीं हैं। वे एक महान हस्ती और प्रेरणास्रोत हैं। उनकी अनुशासनप्रियता, समय की पाबंदी और विनम्रता आज भी प्रेरणा देती है।

वो आज भी हर दिन ब्लॉग लिखते हैं और अपने सोशल मीडिया पर सक्रिय रहते हैं। इतना सब कुछ करने के बाद भी वो अपने प्रशंसकों को नहीं भूलते हैं, उनके प्रशंसकों से ये लगाव ही उन्हें एक सुपरस्टार से अलग बनाता है।

पुरस्कार और सम्मान

  • पद्मश्री (1984)
  • पद्मभूषण (2001)
  • पद्मविभूषण (2015)
  • दादासाहेब फाल्के पुरस्कार (2018)

इसके अलावा उन्हें अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी सम्मान मिला है, जैसे फ्रांस का लीजन ऑफ ऑनर।

वैश्विक पहचान:

Amitabh Bachchan भारतीय सिनेमा से बिल्कुल अलग हैं लेकिन उनकी लोकप्रियता हमें सिर्फ भारतीय में ही देखने को मिलेगी क्योंकि उनकी लोकप्रियता रूस, मिस्र, लंदन, सिडनी जैसे देशों में भी देखने को मिलती है।

क्यों हैं वे खास?

Amitabh Bachchan को उनका संघर्ष और भी खास बना देता है। बार-बार फेल होने के कारण उनका दोबारा उठ कर खरा होना ही उन्हें एक रियल हीरो बनाता है।

वे भारतीय आत्मा का प्रतीक हैं – गिरकर भी उठना, हारकर भी जीतना।

निष्कर्ष:

Amitabh Bachchan का जीवन सिर्फ एक अभिनेता की कहानी नहीं है, बल्कि भारत की कहानी है – संघर्ष, सपनों और पुनर्जन्म की।

सात हिंदुस्तानी से लेकर शोले, दिवालियापन से लेकर KBC, मौत से जंग से लेकर वैश्विक स्टारडम तक – उनका सफर बताता है कि लीजेंड पैदा नहीं होते, वे बनाए जाते हैं।

Frequently Asked Questions:

1. Amitabh Bachchan का जन्म कब और कहाँ हुआ था?

Amitabh Bachchan का जन्म 11 अक्टूबर 1942 को उत्तर प्रदेश के इलाहाबाद (अब प्रयागराज) में हुआ था।

2. Amitabh Bachchan के माता-पिता कौन थे?

उनके पिता हरिवंश राय बच्चन प्रसिद्ध हिंदी कवि थे और माता तेजी बच्चन एक सामाजिक कार्यकर्ता थीं।

3. Amitabh Bachchan को “एंग्री यंग मैन” क्यों कहा जाता है?

1973 की फिल्म ज़ंजीर से उन्होंने एक ऐसे नायक का किरदार निभाया जो भ्रष्टाचार और अन्याय के खिलाफ खड़ा होता है। इस छवि ने उन्हें एंग्री यंग मैन की उपाधि दिलाई।

4. कौन-सी फिल्म के दौरान Amitabh Bachchan को गंभीर चोट लगी थी?

1982 में फिल्म कूली की शूटिंग के दौरान उन्हें गंभीर चोट लगी थी। उस समय पूरा देश उनकी सलामती के लिए प्रार्थना कर रहा था।

5. Amitabh Bachchan ने टीवी पर कब वापसी की?

2000 में उन्होंने कौन बनेगा करोड़पति (KBC) से टीवी पर कदम रखा। इस शो ने उन्हें हर घर का सदस्य बना दिया और उनके करियर को नया जीवन दिया।

6. Amitabh Bachchan को कौन-कौन से प्रमुख पुरस्कार मिले हैं?

पद्मश्री (1984)
पद्मभूषण (2001)
पद्मविभूषण (2015)
दादासाहेब फाल्के पुरस्कार (2018)

7. Amitabh Bachchan की सबसे यादगार फिल्में कौन-सी हैं?

दीवार, शोले, डॉन, अमर अकबर एंथनी, ब्लैक, पा, पिंक और गुलाबो सिताबो उनकी यादगार फिल्मों में शामिल हैं।

8. क्या Amitabh Bachchan आज भी फिल्मों में सक्रिय हैं?

हाँ, 80 वर्ष की उम्र पार करने के बाद भी वे फिल्मों और विज्ञापनों में सक्रिय हैं और लगातार नए प्रयोग करते रहते है।

9. Amitabh Bachchan को “बिग बी” क्यों कहा जाता है?

उनके नाम के शुरुआती अक्षर B (Bachchan) से उन्हें प्यार से Big B कहा जाने लगा। यह उपनाम अब उनकी पहचान बन चुका है।

10. Amitabh Bachchan का जीवन हमें क्या सिखाता है?

उनका जीवन हमें यह सिखाता है कि संघर्ष, असफलता और कठिनाइयाँ सफलता की राह का हिस्सा हैं। गिरकर भी उठना और हर बार खुद को नया रूप देना ही असली जीत है।

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Kuldeep Yadav की शादी के पीछे की अनकही कहानी – रोमांस से लेकर अंगूठियों तक

EDITED BY: Sanjeet

UPDATED: Sunday, March 15, 2026

Kuldeep Yadav

Kuldeep Yadav, अपनी अनोखी स्पिन गेंदबाजी से बल्लेबाजों को चकमा देने वाले चाइनामैन गेंदबाज, हमेशा से अपनी निजी जिंदगी को गुप्त रखते आए हैं। लेकिन 2024 में, भारतीय क्रिकेटर ने मैदान से बाहर निकलकर अपनी लंबे समय की Vanshika Chadha शर्मा से शादी कर ली। यह शादी एक भव्य समारोह में हुई, जिसमें परंपरा और जीत का अद्भुत संगम देखने को मिला। शांत प्रेम प्रसंग से लेकर परिवार की खुशी के बीच अंगूठियां बदलने तक, Kuldeep Yadav की शादी की अनकही कहानी है – एक ऐसी कहानी जो उनकी गुगली गेंदों की तरह ही मनमोहक है।

घरेलू मैदान पर तीखी बहस छिड़ी

खबरों के मुताबिक, उनके प्रेम प्रसंग की शुरुआत कई साल पहले उत्तर प्रदेश के आगरा में हुई थी, जहां दोनों का गृह नगर है। वित्त क्षेत्र में अनुभव रखने वाली, सधी हुई पेशेवर देविका ने Kuldeep Yadav का ध्यान उनके शुरुआती क्रिकेट दिनों में ही आकर्षित कर लिया था। इस जोड़े के करीबी सूत्रों का कहना है कि इसकी शुरुआत पारिवारिक संबंधों से हुई – पड़ोस में होने वाली अनौपचारिक मुलाकातों से लेकर देर रात की बातचीत तक। जैसे-जैसे Kuldeep Yadav ने तरक्की की, 2012 के अंडर-19 विश्व कप के हीरो से लेकर कोलकाता नाइट राइडर्स और दिल्ली कैपिटल्स के साथ आईपीएल स्टार बनने तक, देविका उनकी हमेशा साथ रहीं, छुपकर मैच देखती रहीं और बड़े मैचों से पहले उन्हें प्रेरणादायक संदेश भेजती रहीं।

ज़रा कल्पना कीजिए: Kuldeep Yadav, पांच विकेट लेने के बाद, क्रिकेट दौरों की भागदौड़ के बीच Vanshika के साथ कुछ पल बिता रहे हैं। एक दुर्लभ साक्षात्कार में उन्होंने संकेत दिया था, “उसने मुझे ज़मीन से जोड़े रखा,” और खराब दौर में अपनी मानसिक मजबूती का श्रेय उन्हें दिया। कोविड-19 लॉकडाउन के दौरान उनका रिश्ता और गहरा हो गया, जब वर्चुअल मुलाकातों ने हमेशा साथ रहने के वादे कर दिए।

प्रस्ताव: एक बिल्कुल सटीक क्षण

अंदरूनी सूत्रों के मुताबिक, यह प्रस्ताव 2024 की शुरुआत में, भारत की टी20 विश्व कप जीत की खुशी के चरम पर पहुंचने के ठीक बाद दिया गया था। Kuldeep Yadav ने आगरा में एक निजी छत को चुना, जहां तारों से जगमगाता आसमान था और दूर ताजमहल की आकृति दिखाई दे रही थी – प्यार के शहर में जन्मी इस प्रेम कहानी के लिए यह एक आदर्श दृश्य था। घुटनों पर बैठकर, क्रिकेट के सूक्ष्म डिज़ाइनों (अफवाहों के अनुसार, एक छोटी गेंद की नक्काशी) वाली अंगूठी के साथ, उन्होंने Vanshika को प्रपोज़ किया। Vanshika ने हां कह दी, और इस तरह धैर्य और जुनून पर आधारित एक रिश्ते की नींव रखी गई।

विवाह समारोह: हल्दी, संगीत और शादी की महिमा

नवंबर 2024 में मसूरी के एक ऐतिहासिक स्थल पर तीन भव्य दिनों तक शादी का समारोह संपन्न हुआ, जिसमें उत्तर भारतीय रीति-रिवाजों को आधुनिकता के साथ खूबसूरती से पेश किया गया। पहले दिन की शुरुआत एक जीवंत हल्दी समारोह से हुई, जहां हल्दी का लेप उड़ रहा था और ऋषभ पंत और अक्षर पटेल जैसे साथी खिलाड़ियों की हंसी गूंज रही थी, जो उत्सव में शामिल हुए थे। संगीत की रात बॉलीवुड के गानों से जगमगा उठी – Kuldeep Yadav ने तो “लंदन ठुमका” पर भी जमकर डांस किया, उनके डांस मूव्स उनके सबसे बेहतरीन डांस मूव्स से भी कहीं ज्यादा शानदार थे।

मुख्य कार्यक्रम? 29 नवंबर को पारंपरिक फेरों की रस्म, जिसमें Kuldeep Yadav स्पिन प्रतीकों से सजी शेरवानी में और Vanshika सुनहरे लहंगे में बेहद खूबसूरत लग रही थीं। वायरल वीडियो में दूल्हे को अपनी दुल्हन को निहारते हुए दिखाया गया, जबकि परिवार के आशीर्वाद बरस रहे थे। कोई बॉलीवुड स्टार नहीं था, लेकिन क्रिकेट जगत की हस्तियों ने समारोह को अंतरंग और यादगार बना दिया। शादी के बाद, यह जोड़ा हनीमून के लिए मालदीव रवाना हो गया, जहां उन्होंने समुद्र तट पर सूर्यास्त की तस्वीरें इंस्टाग्राम स्टोरीज पर साझा कीं।

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